फिलीपीन में ज्वालामुखी विस्फोट, 1 किमी की ऊंचाई तक पहुंचा राख और धुआं

ज्वालामुखी फटने के बाद निकलने वाली राख इतनी घातक होती है कि उड़ते विमान का इंजन हवा में जाम कर सकती है।

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Volcano

फिलीपीन के ताल ज्वालामुखी से लावा और राख निकलने के मद्देनजर इसके आसपास के इलाकों को खाली कराया जा रहा है। इससे पूर्व अधिकारियों ने ताल ज्वालामुखी से कई सप्ताह तक लावा और राख निकलने की चेतावनी दी थी। ज्वालामुखी से राख निकलने के साथ ही भूंकप के झटकों और गर्जन की आवाज से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का कार्य तेजी से हो रहा है। यही नहीं, ज्वालामुखी के पास करीब एक किलोमीटर ऊंची राख की दीवार दिखाई दे रही है।

व्यापक विस्फोट की चेतावनी देने के बाद कई लोग घर के सामान के साथ मवेशी और पालतू जानवर भी छोड़ गए हैं। ताल के आस पास के क्षेत्र में स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और फिलीपीन स्टॉक एक्सचेंज को एहतियातन बंद रखा गया। करीब 30,000 लोग अभी आश्रय गृह में हैं।

आठ घंटे में करीब 50 झटके, बढ़ रहा स्तर

रविवार को जब चेतावनी जारी की गई थी, तब उसका स्तर 4 था। जिसके बाद कुछ घंटों या आने वाले दिनों में एक खतरनाक विस्फोट की आशंका उत्पन्न हो गई थी। सबसे उच्च स्तर पांच है, जो तब जारी किया जता है, जब विस्फोट हो रहा हो। फिलीपीन की भूकंप एवं ज्वालामुखी एजेंसी ने मंगलवार को आठ घंटे के भीतर ज्वालामुखी के करीब 50 झटके महसूस किए गए, जिससे मैग्मा के बढ़ने की आशंका है।

Volcano Ash

विमानों को भी खतरा

आने वाल समय में ज्वालामुखी में घातक विस्फोट हो सकता है और इससे निकलने वाली राख से वहां से उड़ने वाले विमानों को खतरा हो सकता है। लिहाजा विमानों की आवाजाही पर खास नज़र रखी जा रही है। मनीला के नीनॉय एक्वीनो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान सेवाएं फिलहाल रोक दी गई हैं। सेवाओं को बहाल करने के लिए अधिकारी काम कर रहे हैं।

क्यों रोकी जाती हैं उड़ानें  

ज्वालामुखी फटने के बाद निकलने वाली राख इतनी घातक होती है कि उड़ते विमान का इंजन हवा में जाम कर सकती है। अमेरिका की नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की एक रिपोर्ट के मुताबिक ज्वालामुखी की राख आसमान में उड़ते विमान की वाइडस्क्रीन पर आने से पायलट को सामने दिखना बंद हो जाता है, या फिर धुंधला दिखने लगता है। इसमें पाये जाने वाले सूक्ष्‍म कण अगर विमान के इंजन में चले जायें, तो इंजन फेल हो सकता है। यही नहीं वॉलकैनिक ऐश में मौजूद रासायनिक तत्वों के संपर्क में आने के बाद विमान के कई सारे सेंसर काम करना बंद कर देते हैं, जिसकी वजह से पायलट को गलत रीडिंग मिलती है, और तब विमान को उड़ाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में विमान के क्रैश होने की आशंका बढ़ जाती है।

आखिरी बार 1977 में हुआ था विस्फोट

सरकार के भूकंप विशेषज्ञों ने पाया है कि लावा ताल ज्वालामुखी के मुख की ओर आ रहा है। मनीला से 65 किलोमीटर दक्षिण स्थित यह देश का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है और इसे पहले 1977 में इसमें विस्फोट हुआ था।

सांस लेना हो रहा खतरनाक

स्थानीय आपदा कार्यालय के अनुसार ज्वालामुखी वाले द्वीप से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक स्थिति बिगड़ी तो नजदीकी द्वीप के लोगों को भी हटने का आदेश दिया जाएगा। राख मनीला पहुंच चुकी है। इस माहौल में लोगों के लिए सांस लेना खतरनाक है। गौरतलब है कि जनवरी 2018 में माउंट मेयन से निकली लाखों टन राख और लावा की वजह से हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।

New Delhi | PBNS Bureau