फिर दिखी विपक्ष में फूट

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Opposition Meeting

संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में एकजुट होकर केंद्र सरकार का विरोध करने के लिये कांग्रेस द्वारा बुलायी गई बैठक में जिस तरह विपक्ष अलग-थलग दिखा, उससे यह साफ है कि विपक्ष में फूट है। मोदी सरकार के खिलाफ विफक्ष की मौसमी एकता चुनाव के करीब आते ही बिखरने लगती है। यही एकता कई मोकों पर सड़क पर तो दिख जाती है लेकिन संसद में आकर तार-तार हो जाती है।

बीते 6 महीने में विपक्ष में हुआ कई बार बिखराव

13 जनवरी 2020: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संशोधित नागरिकता कानून एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के लिए 13 जनवरी 2020 को एक बैठक बुलाई। लेकिन टीएमसी, आप, बीएसपी, और शिवसेना ने इस बैठक में शामिल होने से इंकार कर दिया। खास बात है कि ये चारों दल इन मुद्दों पर बाकी विपक्ष के साथ होने का दावा करते रहे हैं। यहां तक कि लोक सभा में सीएए का समर्थन करने वाली शिव सेना को कांग्रेस के दबाव में राज्य सभा में यू टर्न लेना पड़ा था। क्योंकि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार चल रही है। वहीं डीएमके और सपा ने बैठक में नहीं आने की कोई वजह नहीं बताई।

टीएमसी और आप सूबे में होने वाले चुनाव के चलते विपक्ष से अपनी दूरी बना रहे हैं लेकिन दोनों की वजहें अलग-अलग हैं। दरअसल ममता बनर्जी जहां पश्चिम बंगाल में सीएए के खिलाफ हो रहे आंदोलन से मिलने वाले सियासी/चुनावी फायदे को विपक्ष के बाकी दलों से साझा नहीं करना चाहती हैं, वहीं आम आदमी पार्टी, दिल्ली चुनाव के मद्देनजर सीएए का खुलकर विरोध करने से बचना चाहती है, क्योंकि उसे, इससे धार्मिक ध्रुवीकरण का खतरा लग रहा है।

बसपा सुप्रीमो मयावती ने बैठक में नहीं आने की वजह राजस्थान में बसपा विधायकों को तोड़ना बताया है लेकिन असल वजह है सीएए से लाभ पाने वालों में ज्यादा संख्या दलितों का होना है। पर कांग्रेस ने सीएए को मुसलमानों के खिलाफहोने का नैरेटिव (रिवायत) दे कर मुस्लिम वोटों के दावेदार बसपा और सपा सरीखे दलों को भी सीएए का विरोध करने का दबाव बना दिया। इस बीच सीएए के समर्थन में बढ़ता जनमानस बसपा और सपा को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर रही है।

शिवसेना ने कांग्रेस के दबाव में सीएए पर यू टर्न तो कर लिया था लेकिन उसे इससे भारी सियासी नुकसान की चिंता सताने लगी है।

11 दिसंबर 2019: इस दिन राज्य सभा में सीएबी विधेयक 125 मतो से पास हुआ और विरोध में 99 मत पड़े थे। हालांकि सत्ता पक्ष का राज्यसभा में बहुमत नहीं था। यानी विपक्ष की एकता में सेध लगी। टीडीपी ने बिल का समर्थन किया था वहीं विपक्ष ने सरकार को रोकने की साझा रणनीति बनाई थी।

5 अगस्त 2019: इस दिन धारा 370 और 35A को जम्मू कश्मीर से हटाने का विधेक राज्य सभा में लाया गया। इस विधेयक के समर्थन में 125 वोट और विरोध में 61 वोट पड़े। यानी कांग्रेस के इस विधेयक के विरोध के लिए विपक्ष की बनाई गई साझा रणनीति के बावजूद विपक्षी खेमे के कई सासंद सदन से गैर हाजिर रहे।

विपक्षी एकता का गुब्बारा पहले भी फूटा

2019 लोक सभा चुनाव के पहले ममता बनर्जी की 19 जनवरी 2019 को कोलकता में हुई यूनाइटेड इंडिया रैली में 20 विपक्षी दलों को जमावाड़ा हुआ। इसके बाद महागठबंधन को लेकर खूब कसीदे कढ़े गए, लेकिन लोक सभा चुनाव के ठीक पहले ही ममता दीदी ने महागठबंधन बनाए जाने सी पीछ हट कर विपक्षी एकता को तार-तार कर दिया।

दरअसल विपक्ष में दरार की एक खास वजह मुस्लिम वोट है, जिसको लेकर सब मोदी सरकार से लड़ रहें हैं और अपस में भी लड़ रहे हैं।

New Delhi | PBNS Bureau