पद्म श्री सम्मान पाने वालों में वो चेहरे जो अब तक थे गुमनाम

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Padma Awards winners

भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री सम्मानों की घोषणा की गई। अलग-अलग क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले 141 लोगों की इस सूची में तमाम ऐसे भी हैं, जो दुनिया की चकाचौंध से दूर अपनी दुनिया बसा कर जमीनी स्तर पर देश की सेवा कर रहे हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं देश के Unsung Heroes की, जिन्‍हें सरकार ने सर्वोच्‍च सम्मानों से नवाज़ा जाएगा।

इस वर्ष 7 लोगों को पद्म विभूषण, 16 को पद्म भूषण और 118 लोगों को पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया है। इनमें कुछ ऐसे लोगों को पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा गया है, जिनका जीवन हर किसी के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। आइये एक नज़र डालते हैं उनके जीवन पर और देखते हैं, कि वो अपने प्रयासों से आस-पास की दुनिया को बदलने का कार्य किया।

जगदीश लाल अहूजा (लंगर बाबा)- पद्म श्री, समाज सेवा (सेवा) के क्षेत्र में

Jagdish Lal Ahuja

पंजाब के रहने वाले जगदीश लाल अहूजा पिछले दो दशकों से हर रोज़ 500 से अधिक मरीजों को मुफ्त भोजन करवाते हैं। पाकिस्तान के पेशावर शहर में जन्में अहूजा बंटवारे के बाद भारत आ गये। आज उनको लोग लंगर बाबा के नाम से जानते हैं। उन्होंने 1980 में मुफ्त भोजन बांटना शुरू किया, वर्ष 2000 में वो पीजीआईएमईआर आ गये, जहां उन्‍होंने भोजन बांटना शुरू किया। देखते ही देखते खाने वाले जरूरतमंदों की संख्‍या बढ़कर प्रति दिन 2000 के करीब पहुंच गई। लंगर बाबा गरीब मरीजों को केवल भोजन ही नहीं बांटते हैं, बल्कि कंबल, कपड़े आदि भी मुहैया कराते हैं। उन्‍होंने अपने इस मिशन को पूरा करन के लिये अपनी संपत्ति तक बेच दी।


मोहम्मद शरीफ (चाचा शरीफ)- पद्म श्री, समाज सेवा (अंतिम संस्कार सेवा) के क्षेत्र में

Mohammad Sharif

पेशे से साइकिल मैकेनिक, मोहम्मद शरीफ को लोग चाचा शरीफ कह कर बुलाते हैं। शरीफ ने पिछले 25 वर्षों में 25 हजार से अधिक हजारों लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करवाया है। और यह सिलसिला आज भी जारी है। अंतिम संस्कार करते वक्त वो कभी भी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते। मृतक जिस धर्म का होता, उसी के आधार पर उसके शव का अंतिम संस्कार किया जाता है।


जावेद अहमद टक (अनंतनाग के अपने)- पद्म श्री, समाज सेवा (दिव्यांगों की सेवा) के क्षेत्र में

Padma Sri Javed Ahmed

कश्‍मीर के दिव्यांग बच्चों को मुफ्त शिक्षा और शिक्षण सामग्री मुहैया करवाने वाले जावेद अहमद, ‘अनंतनाग के अपने’ हैं। पिछले 2 दशक से वो यह सेवा कर रहे हैं। उन्‍होंने अनंतनाग और पुलवामा के 40 से अधिक गांवों में मुफ्त सेवाएं दी हैं। 1997 में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के बाद से उन्‍होंने व्‍हील चेयर पकड़ ली, लेकिन उनके इरादे उतने ही मजबूत रहे जितने पहले थे।


तुलसी गौडा (वन का ज्ञानकोश) – पद्म श्री समाज सेवा (पर्यावरण) के क्षेत्र में

Padma Shri Tulasi Gowda

कर्नाटक की रहने वाली तुलसी गौडा वन का ज्ञानकोश हैं। आप जंगलों में पायी जाने वाले पेड़ों की हज़ारों प्रजातियों के ज्ञान का भंडार हैं। 72 वर्ष की उम्र में भी तुलसी बच्‍चों समेत हर वर्ग के लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरूक करने का कार्य करती हैं। शुरुआत में उन्हें वन विभाग ने अस्थाई नौकरी दी और बाद में सदस्य के रूप स्‍थाई नौकरी दी।


सत्यनारायण मुंडायूर (अरुणाचल के अंकल मूसा) – पद्म श्री, समाज सेवा (शिक्षा) के क्षेत्र में

Satyanarayan Mundayoor

अरुणाचल के रहने वाले सत्यनारायण मुंडायूर मूल रूप से केरल के हैं, लेकिन अपनी सेवाएं अरुणाचल में बच्‍चों को पढ़ा कर दे रहे हैं। अरुणाचल के दूर-दराज़ के इलाकों में संस्कृति से जुड़ा ज्ञान बांटते हैं। उन्‍होंने 13 बामबूसा पुस्तकालय स्‍थापित किये। इन पुस्तकालयों में 10 हजार से अधिक पुस्तकें हैं। उन्‍होंने बच्‍चों के लिए अरुणाचल प्रदेश पर मलयालम में पुस्तकें लिखी हैं। सत्यनारायण अपने इस अभियान को शुरू करने से पहले मुंबई में रेवेन्यू ऑफीसर थे। उन्‍होंने नौकरी छोड़ कर अपने इस अभियान को आगे बढ़ाया।


अब्दुल जब्बार (वॉयस ऑफ भोपाल)- पद्म श्री, समाज सेवा (सेवा) के क्षेत्र में

Padma Sri Abdul Jabbar
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़‍ितों का उपचार एवं पुनर्वास कराने के लिए अब्‍दुल जब्बार को मरणोपरांत इस सम्मान से नवाज़ा गया है। उन्‍होंने भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए 2300 पुरुषों की विधवाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग दी। साथ ही न्यायालय में याचिका दाखिल करने से लेकर उपचार में उनकी मदद की।


ऊषा चौमर (सुलभ से स्वच्छता) – पद्म श्री, समाज सेवा (स्वच्छता) क्षेत्र में

Padma Sri Usha Chaumar

ऊषा 7 वर्ष की आयु से मल उठाने का काम कर रही थीं। 10 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया। लोगों ने उन्‍हें अछूत कहते हुए बाज़ारों में और मंदिरों में जाने से मना करने लगे। ऊषा नई दिशा नाम के गैर सरकारी संगठन की मदद से सुलभ इंटरनेशनल से जुड़ गईं। अपनी मेहनत और लगन के बल पर आप सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन की अध्‍यक्ष बनीं।


पोपटराव पवार (ग्राम स्वराज के सुपर सरपंच) – पद्म श्री, समाज सेवा (जल) क्षेत्र में

Padma Sri Popatrao Pawar

महाराष्‍ट्र के अहदमनगर जिले के रहने वाले पोपटराव पवार ने सूखाग्रस्त गांवों में पानी पहुंचाने का काम किया। आपने हिवारे बाज़ार गांव के सरपंच के पद पर रहते हुए गांवों का नक्शा बदल कर दख दिया। आज यह गांव रोल मॉडल के रूप में प्रख्‍यात है। आज उनके गांव में एक भी परिवार गरीबी रेखा के नीचे नहीं है, यहां कोई मदिरापान नहीं करता। उन्‍होंने साढ़े चार लाख पेड़ लगाये हैं।


हरेकला हजब्बा (अक्षर सैंटा) – पद्म श्री, समाज सेवा (शिक्षा) क्षेत्र में

Padma Sri Harekala Hajabba

हरेकला हजब्बा स्वयं अशिक्षित हैं, लेकिन दूसरों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। पेशे से फल विक्रेता, हरेकला पिछले 20 वर्षों में अपनी कमाई गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते आ रहे हैं। उन्होंने एक मस्जिद से अपनी मुहिम की शुरुआत की, जिसे आगे चलकर सरकार और आम लोगों की मदद से दक्षिण कन्नड़ जिला पंचायत हायर प्राइमरी स्कूल में परिवर्तित कर दिया।


डा. अरुणोदय मोंडल (सुंदरबन के सुजन) पद्म श्री स्वास्थ्‍य के क्षेत्र में

Arunoday Mondal

पेशे से डॉक्टर डा. अरुणोदय मोंडल हर सप्ताह शनिवार-रविवार को 6 घंटे का सफर करके सुंदरबन के गांवों में लोगों का मुफ्त इलाज करते हैं। हर हफ्ते 250 लोगों का उपचार करते हैं, जिनमें 80 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे होते हैं। इसके अलावा रक्त दान शिविर व स्वास्थ्‍य शिविरों का आयोजन करते हैं। अब तक आप 4 हजार से अधिक लोगों का मुफ्त उपचार कर चुके हैं।


राधा मोहन एवं साबरमती (संभव से संचय) – पद्म श्री जैविक कृषि के क्षेत्र में

Radha Mohan Sabaramatee

किसानों को जैविक कृषि की ओर आकर्षित करने के लिए रिटायर्ड प्रोफेसर राधा मोहन एवं पर्यावरणविद साबरमती ने संभव नाम की संस्था शुरू की। न्यानगढ़ जिले में 36 एकड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया। आपने 1000 से अधिक पौधों की प्रजातियों की खेती में बड़ा योगदान दिया। एडॉप्ट ए सीड मुहिम के साथ आपने किसानों को मुफ्त में धान की 500 से अधिक प्रजातियों और 1000 से अधिक पौधों के बीज वितरित किए, इस शर्त पर कि वे इसके प्रति औरो को भी जागरूक करेंगे।


कुशल कोंवर सर्मा (हाथी के साथी) – पद्म श्री – स्वास्‍थ्‍य (पशु चिकित्सा) के क्षेत्र में

Kushal Konwar Sarma

एक बार एक घायल हाथी की सही समय पर इलाज नहीं मिलने पर मृत्यु हो गई, जिस घटना ने कुशल सर्मा को झकझोर कर रख दिया। तब से उन्‍होंने हाथियों के इलाज की ठान ली। गुवाहाटी के रहने वाले कुशल हर साल 700 से अधिक हाथियों का इलाज करते हैं। आप पिछले तीन दशकों से अब तक एक भी साप्ताहिक अवकाश नहीं लिया। अपने करियर में उन्‍होंने 20 हाथियों को मरते-मरते बचाया। आप हाथी को एनेस्थीसिया देने की एक अलग तकनीक का प्रयोग करते हैं। हाथी के अलावा गेंडे का इलाज भी करते हैं। कुशल कोंवर गुवाहाटी के कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंसेस के विभागाध्‍यक्ष हैं।


ट्रिनिटी साइऊ (टरमरिक ट्रिनिटी) – पद्म श्री- कृशि के क्षेत्र में

Trinity Sahoo

टरमरिक यानी हल्दी की खेती करने वाली महिलाओं की आय को तीन गुना तक बढ़ाने में मदद करने वाली ट्रिनिटी साइऊ एक स्कूल टीचर और जनजातीय किसान हैं। जयंतिया पहाड़‍ियों पर रहने वाली 800 महिलाओं को हल्‍दी की खेती के लिए प्रेरित किया और उनके उत्पादों की मार्केटिंग में हाथ बंटाया। यहां से हल्दी को कई देश के कई हिस्सों में बेचने का काम किया जाता है।


डा. रवि कन्नन – पद्म श्री – स्वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में

Ravi Kannan

चेन्नई के मूल निवासी डा. रवि कन्नन कैंसर विशेषज्ञ हैं, जिन्‍होंने बराक वैली में अब तक 70 हजार से अधिक गरीब कैंसर के मरीजों का मुफ्त इलाज किया है। केवल इलाज ही नहीं बल्कि इलाज के दौरान ठहरने की व्‍यवस्‍था, भोजन आदि भी मुफ्त देते हैं। उनके ग्रामीण कैंसर केंद्र ने आज एक अस्‍पताल एवं शोध संस्‍थान का रूप ले लिया है। 2007 में आपने चेन्नई में नौकरी छोड़ दी और असम स्‍थानांतरित हो गए। उन्‍होंने अपने इस सामाजिक कार्य की शुरुआत बराक वैली से शुरू की, जहां से अस्‍पताल की दूरी करीब 300 किलोमीटर थी।


एस रामकृष्‍णन – पद्म श्री – समाज सेवा (दिव्यांग) के क्षेत्र में

S Ramakrishnan

पिछले चार दशकों में एस राम कृष्‍णन ने 14 हजार से अधिक दिव्यांगों के पुनर्वास को सफल बनाने का काम किया है। उन्‍होंने अमर सेवा संगम नाम की संस्‍था की स्‍थापना कर यह कार्य शुरू किया। सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्‍चों के लिए एक डेकेयर सेंटर भी चलाते हैं।


सुंदरम वर्मा – पद्म श्री – समाज सेवा (पर्यावरण) के क्षेत्र में

Sundaram Verma

राजस्थान के शेकावटी में एरिड क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक पेड़ लगाये। यह ऐसी जगह है, जहां पौधे लगाने के कुछ ही दिन बाद सूख जाते हैं। लेकिन आज महज 1 लीटर पानी प्रति पेड़ प्रयोग कर इस पूरे क्षेत्र को हरा-भरा कर दिया। उनकी विशेष तकनीक वर्षा जल संचयन में भी कारगर साबित हुई है। उन्‍होंने 6 बगीचों को स्‍थापित किया, जहां डेढ़ लाख से अधिक पौधे हैं।


मुन्ना मास्टर (भाईचारे के भजन) – पद्म श्री – कला के क्षेत्र में

Munna Master

जयपुर के बगरु के एक मुस्ल्मि परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुन्ना मास्टर रामकृष्‍ण के भजन गाते हैं। उनकी पुस्तक श्री श्‍याम सुरभि वंदना इस इलाके में लोकप्रिय है। आप पांच वक्त की नमाज़ अदा करते हैं और साथ ही भजन गाते हैं।


योगी एरोन – पद्म श्री – स्वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में

Padma Sri Yogi Aeron

देहरादून के रहने वाले योगी एरोन पेशे से डॉक्‍टर हैं और जलने और चोट के मरीजों का मुफ्त इलाज करते हैं। आप हर साल 500 से अधिक मरीजों का इलाज करते हैं।


राहीबाई सोमा पोपेरे – पद्म श्री – कृषि के क्षेत्र में

Padma Sri Rahibai Soma

जनजातीय महिला राहीबाई सोमा अहमदनगर जिले में रहती हैं और धान और सब्जियों के उत्पादन के लिए अच्‍छी क्वालिटी के बीज मुहैया कराती हैं।


हिम्मता राम भंभू

Himmata Ram
राजस्थान के रेगिस्तान में आप लाखों पेड़ लगा चुके हैं। कई क्षेत्र जहां कभी एक भी पेड़ नहीं था, आज हरियाली छायी हुई है। एग्रो-प्लांटेशन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले हिम्मता राम हर रोज 1000 से अधिक चिड़‍ियों को खाना खिलाते हैं। उन्‍होंने नागपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बारमेड़, सीकर और अजमेर में भी लोगों को इस काम के लिए प्रेरित किया।


मूईक्कल पंकजाक्षी – पद्म श्री – कला के क्षेत्र में

Moozhikkal Pankajakshi

केरल की रहने वाली मूईक्कल ने कठपुतलियों का थिएटर चलाती हैं। आप कठपुतली नृत्य के माध्‍यम से रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों को सुनाती हैं। पंकजाक्षी यह कार्य 8 वर्ष की आयु से कर रही हैं।


मिलिए ब्राज़ील की उन दो महिलाओं से जिन्हें मिला पद्म श्री सम्मान

New Delhi | PBNS Bureau