बदलते कश्मीर की नई तस्वीर

अब कश्मीर में आतंकवाद की जड़े सूखने लगी हैं। युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार दिन रात प्रयासरत है। कश्मीरी युवाओं का आतंक की ओर से मोह भंग हो रहा है।

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Jammu Kashmir

केन्द्र सरकार द्वारा 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से कश्मीर की फिज़ा दिनोंदिन बदलती जा रही है। आतंकवाद के साये में घिरा रहने वाला कश्मीर अब विकास की डगर पर चल पड़ा है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भले ही कश्मीर को लेकर दुनिया भर में तमाम बातें गढ़ रहा हो, मानवाधिकार की दुहाई दे रहा हो, लेकिन असलियत तो कुछ और ही है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र संघ में कश्मीर का मुद्दा उठाया, लेकिन चीन को छोड़कर किसी भी राष्ट्र ने उसका समर्थन नहीं किया। उसका कारण यही है कि पूरा विश्व देख रहा है कि कश्मीर के विकास की गति पिछले पांच महीनों में बढ़ गई है।

खास बात यह है कि अब कश्मीर में आतंकवाद की जड़े सूखने लगी हैं। युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार दिन रात प्रयासरत है। कश्मीरी युवाओं का आतंक की ओर से मोह भंग हो रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद के आंकड़ों पर नजर डालें, तो आपको भी यह जानकर गर्व होगा कि कश्मीर सच में बदल रहा है। जो आतंकी संगठन कभी कश्मीर के बाशिंदों को बरगलाते थे, धमकाते थे, आज वे खुद खौफ में जी रहे हैं।

बड़े बदलाव, जो अनुच्छेद 370 हटने के बाद दिखे

अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे बड़ा बदलाव है आतंकी गतिविधियों में आयी गिरावट। कश्मीर में युवा जो कभी आतंकी संगठन ज्वाइन करने में आगे रहते थे, आज बेहतर जिंदगी की ओर बढ़ रहे हैं। सेना द्वारा 3 दिसम्बर, 2019 को जारी किए गए बयान में यह कहा गया है कि बीते 05 अगस्त, 2019 से नवंबर के अंत तक यानी लगभग 4 महीने में मात्र 14 युवाओं ने ही आतंक की ओर कदम बढ़ाया है। जबकि, पूर्व में 12 से 13 युवा हर महीने आतंक की पाठशाला में दाखिला लेते थे।

गौर करने वाली बात यह है कि, पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकवाद को हवा देने का भरसक प्रयास किया। कश्मीरी युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती करने की पुरजोर कोशिशें कीं। लेकिन, उसका यह मंसूबा भी भारत सरकार ने सफल नहीं होने दिया। कश्मीर में जो पत्थरबाजी होती थी, उसके लिए सोशल मीडिया और व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जाता था। अब वो सारे प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।

खात्मे की ओर हिजबुल मुजाहिदीन

आतंकवादियों ने अपनी जड़े बचाए रखने की बहुत कोशिश की। लेकिन, सुरक्षाबलों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। आतंकियों ने तीन महीने में 299 बार हमला किया। लेकिन, सुरक्षा बलों के आगे उनके सारे मंसूबे धरे के धरे रह गए। हमारे जवानों ने 58 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया।

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने 20 जनवरी, 2020 को कहा कि दक्षिणी कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन पूरे तौर से खत्म होने की कगार पर है। इस इलाके में सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन के लगभग सभी आतंकी मारे जा चुके हैं। जम्मू-कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों का हिजबुल ही सबसे बड़ा संगठन है। बीते 15 दिनों में सुरक्षाबलों द्वारा की गयी कार्रवाई में दक्षिणी कश्मीर में हिजबुल के सात आतंकी मारे गए हैं।

पिछले सप्ताह त्राल के गुलशनपोरा में सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी उमर फैयाज लोन और आदिल बशीर मीर मारा गया। जबकि तीसरा आतंकी, फैजान अहमद भट्ट, जोकि जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी था, वह भी मारा गया। सभी आतंकी संगठनों द्वारा घुसैठ की कोशिशों को कैसे नाकाम किया जा रहा है, उसका सबसे ताज़ा उदाहरण आज यानी 25 जनवरी का है, जहां सेना ने त्राल में हुई मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया।

40 हजार स्थानीय प्रतिनिधि बनें सशक्त, मिलेगा सुरक्षा बीमा

केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर में चुने गए 40 हजार स्थानीय प्रतिनिधियों को सशक्त बनाने के लिए पूरे तौर प्रयासरत है। केन्द्र सरकार ने एक मजबूत पहल के तहत पंचायतों की वित्तीय शक्तियों में खासा इजाफा किया है। पंचातयों की वित्तीय शक्तियां 10 हजार से बढ़ाकर एक लाख रूपए और ब्लॉक परिषदों की वित्तीय शक्ति को 25 हजार से बढ़ाकर 25 लाख रूपए तय की है।

केन्द्र सरकार 40 हजार से अधिक पंचायत सदस्यों को सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर बीमा कवर के तहत ला रही है। केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का निर्देश दिया है। साथ ही, देशाटन के आयोजन किए जाएंगे जिससे कि सरपंचों को अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया जा सके।

गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर में पंच और सरपंचों के चुनाव हुए। लोकतांत्रिक तरीके से हुए इन चुनावों से जन प्रतिनिधियों की एक नई खेप तैयार हुई है।

विकास के लिए केन्द्र सरकार उठा रही मजबूत कदम

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से ही केन्द्र सरकार ने कश्मीर घाटी के विकास के लिए तमाम प्रयास नए प्रयास शुरू कर दिए हैं। विकास को गति प्रदान करने के लिए सरकार पूरी तरह से तत्पर है।

जम्मू-कश्मीर में आर्थिक विकास के लिए प्रशासन ने जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने नए केंद्र शासित प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए लैंड बैंक बनाना शुरू कर दिया है और औद्योगिक प्रमोशन पॉलिसी 2020 बना रहा है, जो कुछ ही हफ्तों में जारी कर दिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में पंचायतों के विकास कार्यों के लिए केन्द्र सरकार करोड़ों रूपए का बजट आवंटित किया है। यही नहीं 36 केंद्रीय मंत्रियों के जम्मू-कश्‍मीर दौरे पर एक के बाद एक परियोजनाओं का उद्घाटन भी विकास कार्यों की गवाह हैं।

New Delhi | PBNS Bureau