Union Budget 2020: फल-फूल से फलेंगे-फूलेंगे किसान

0
33
horticulture export in india

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के बजट में खाद्य उत्पादों के निर्यात यानी एक्सपोर्ट के क्षेत्र में कई बड़ी घोषणाएं की हैं। ये वो घोषणाएं हैं, जिनसे फल, फूल, सब्जियों, अनाज, आदि के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। और इससे न केवल किसान और ग्रामीण भारत के व्‍यापारी आर्थिक रूप से फलेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में निर्यात क्षेत्र का योगदान तेजी से बढ़ेगा।

घोषणाएं जो खाद्य उत्पादों के निर्यात से जुड़ी हैं-

  • बागवानी क्षेत्र में विपणन और निर्यात को बेहतर बनाने के लिए ‘एक उत्‍पाद, एक जिला’ की नीति लागू होगी।
  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा कृषि उड़ान योजना के तहत हवाई मार्ग से फूड प्रॉडक्‍ट्स विदेश भेजे जाएंगे।
  • दूध प्रसंस्‍करण क्षमता को वर्ष 2025 तक 53.5 मिलियन मीट्रिक टन से दोगुना कर 108 मिलियन मीट्रिक टन के स्‍तर पर पहुंचाया जाएगा।
  • 2024-25 तक मत्‍स्‍य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के पुरजोर प्रयास किए जाएंगे।

तेजी से बढ़ेगा खाद्य उत्पादों का निर्यात

भारत दुनिया के तमाम देशों में कृषि एवं खाद्य उत्पाद, कपड़ा, कार्पेट, काजू, रसायन, कॉफी, कॉटन, सॉफ्टवेयर, जेम्स एंड ज्वेलरी, हस्तशिल्प, हैंडलूम, चमड़ा, प्लास्टिक, दवाएं, वन उत्पाद, मसाले, खेल उपकरण, चाय, तम्बाकू, ऊन व ऊनी कपड़ों, आदि का सबसे अधिक निर्यात करता है।

खाद्य उत्पादों की बात करें, तो सउदी अरब जहां भारत से हरी मिर्च, काली मिर्च, सब्जियां, चावल, आदि खरीदता है, वहीं फिलीपींस और यूरोपियन यूनियन को भारत का बासमाती चावल सप्‍लाई किया जाता है। टर्की को भारी मात्रा में मीट निर्यात किया जाता है। चीन और ऑस्ट्रेलिया को भारत के अंगूर बहुत पसंद हैं, तो विएतनाम को मूंगफली, वहीं सर्बिया में भारत के आम,अनन्नास, पपीता और केले की बड़ी डिमांड है। और तो और अमेरिका समेत कई देशों में भारत से चीनी का निर्यात किया जाता है।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (अपेडा) से प्राप्त डाटा के अनुसार खाद्य उत्पादों में भारत से सबसे अधिक मात्रा में अनाज निर्यात किया जाता है। 2018-19 में भारत ने 8181 मिलियन डॉलर का अनाज निर्यात किया। जोकि कुल खाद्य उत्पाद निर्यात का 44 प्रतिशत था। इसी प्रकार दूसरे नंबर पर मीट-मछली का निर्यात है।

Food Products Export

बजट में आज ‘एक उत्पाद, एक जिला की नीति’ की घोषणा की गई है, जिसके अंतर्गत फल एवं सब्जियों के निर्यात को बल मिलेगा। हर जिले में निर्यात केंद्र खोले जाने छोटे किसान भी अपने उत्पादों को सीधे अंतर्राष्‍ट्रीय बाज़ार में बेच सकेंगे। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियों का निर्यात जो अभी 1300 मिलियन डॉलर का है, तेज गति को पकड़ेगा।

दूध से निकलेगी और मलाई

वहीं दुग्ध उत्पादों की बात करें तो अपेडा की रिपोर्ट के अनुसार भारत छाछ, पनीर, मक्खन, मिल्क पॉवडर, दूध, घी, आदि के निर्यात में काफी आगे है। हर साल 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक दुग्‍ध उत्पाद निर्यात किये जाते हैं। टर्की, यूनाइटेड अरब अमीरात, मिस्र, बांग्‍लादेश और भूटान आदि देश भारत से ही दुग्‍ध उत्पाद खरीदते हैं।

2018-19 में भारत ने कुल 1,13,721.70 मीट्रिक टन उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कीमत 2422.85 करोड़ थी। इस बजट में वित्त मंत्री ने दुग्‍ध व दुग्‍ध उत्‍पादों के उत्पादन को दुगना करने का लक्ष्‍य रखा है। यानी 2025 तक दूध प्रसंस्‍करण क्षमता को 53.5 मिलियन मीट्रिक टन से दोगुना कर 108 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचाया जाएगा। यानी दुध से अब और अधिक मलाई निकलेगी। यानी इस क्षेत्र में निर्यात के भी दुगने होने की प्रबल संभावना है।

दुग्‍ध उत्‍पादों का निर्यात बढ़ने से सबसे ज्यादा लाभ उत्तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु के किसानों को सबसे अधिक होगा।

मत्‍स्‍य निर्यात के क्षेत्र में विस्तार

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अनुसार 2014-15 में भारत ने कुल 10,51,243 टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कीमत 33,441.61 करोड़ रुपए थी। वहीं 2018-19 में भारत ने 13,92,559 टन उत्पादों का निर्यात किया, जिसकी कीमत 46,589.37 करोड़ रुपए रही।

जिस तरह से 2024-25 तक मत्‍स्‍य निर्यात को एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा है, उसे देखते हुए यह स्पष्‍ट है कि आने वाले समय में मछुवारों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं।

इन सभी उत्पादों को समय पर पहुंचाने का काम कृषि उड़ानें करेंगी, जिनकी घोषणा आज बजट में की गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा कृषि उड़ान योजना के तहत हवाई मार्ग से फूड प्रॉडक्‍ट्स विदेश भेजे जाएंगे।

New Delhi | PBNS Bureau