हाईकोर्ट ने गूगल, व्हाट्सऐप को दिया जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश

इसी तरह का अनुरोध जेएनयू प्रशासन और एसबीआई की शाखा को भी भेजा गया था, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला है।

0
11

देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के सम्बन्ध में दिल्ली उच्च न्यायालय ने व्हाट्सऐप और गूगल को पुलिस द्वारा मांगी गयी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट का यह निर्देश व्हाट्सऐप और गूगल की आंतरिक नीतियों के मुताबिक संरक्षित रखने और उपलब्ध करवाने हेतु दिया गया है। इस घटना के सिलसिले में वसंत कुंज (उत्तर) पुलिस थाने में तीन प्राथमिकियां दर्ज करवाई गई हैं।

कोर्ट ने क्या कहा

न्यायमूर्ति बृजेश सेठी ने पुलिस से कहा कि वह गवाहों को जल्द से जल्द तलब करे और उन दो व्हाट्सऐप समूहों के सदस्यों के फोन जब्त करे, जिन पर पांच जनवरी को जेएनयू में हुई हिंसा का समन्वय किया गया था। अदालत ने जेएनयू प्रशासन और परिसर के भीतर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा को निर्देश जारी किए और कहा कि पुलिस द्वारा मांग गए हमले के सीसीटीवी फुटेज वह संरक्षित रखें और जल्द से जल्द उपलब्ध करवाएं।
यह निर्देश जारी करते हुए अदालत ने जेएनयू के प्रोफेसर अमित परमेश्वरन, अतुल सूद और शुक्ला विनायक सावंत की ओर से दायर याचिका का निबटारा कर दिया। याचिका में दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार को पांच जनवरी के जेएनयू हमले से संबंधित डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य संरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

गूगल ने यह कहा

आदेश आने से पहले गूगल ने अपनी दलीलों में अदालत को कहा था कि अगर पुलिस उसे दो व्हाट्सऐप समूहों के सदस्यों की जानकारी दे, ईमेल आईडी आदि दे तो वह पता लगा सकती है कि चेट हिस्ट्री का बैकअप गूगल ड्राइव पर हुआ है या नहीं। अगर बैकअप है तो उसे संरक्षित करके जांच एजेंसी को उपलब्ध करवाया जा सकता है।
गूगल ने अदालत को बताया कि उसके सिस्टम पर जो कुछ भी उपलब्ध है वह उसे संरक्षित रखेगी।

व्हाट्सऐप की दलील

दूसरी ओर, व्हाट्सऐप ने अदालत को बताया कि चैट एक बार दूसरे व्यक्ति के पास पहुंच जाती है तो वह सर्वर पर स्टोर नहीं रहती है। उसने दावा किया कि चैट भेजने वाले और पाने वाले के फोन पर ही मिल सकती है।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को यह बताया

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसकी ओर से 10 और 11 जनवरी को व्हाट्सऐप को जानकारी और डेटा उपलब्ध करवाने का अनुरोध भेजा गया था लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। पुलिस ने बताया कि इसी तरह का अनुरोध जेएनयू प्रशासन और एसबीआई की शाखा को भी भेजा गया था, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला है।
पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि उसने 37 लोगों की पहचान की है जो दो ग्रुप का हिस्सा थे। उन्हें पेशी के नोटिस भेजे गए हैं। पुलिस ने बताया कि उन्होंने अब तक कोई फोन जब्त नहीं किया है।

पांच जनवरी को नकाबपोश लोगों की भीड़ ने जेएनयू परिसर में घुसकर तीन हॉस्टलों के छात्रों को निशाना बनाया था। नकाबपोशों के हाथों में लाठियां और लोहे की छड़ें थीं। उन्होंने तीन होस्टलों में छात्रों को पीटा और परिसर में तोड़फोड़ की।

New Delhi | PBNS Bureau