भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने में पूर्वात्तर राज्यों का होगा बड़ा योगदान

पूर्वोत्तर राज्यों के गैस ग्रिड से जुड़ने के बाद ईधन पहुंचाना सुगम हो जायेगा और इससे बड़े उद्योगों को सस्ता ईंधन प्राप्त हो सकेगा। लिहाज़ा यह ग्रिड निकटतम भविष्‍य में नॉर्थ ईस्ट की अर्थव्‍यवस्‍था को नई ऊर्जा प्रदान करेगी

0
29
Assam
Photo Credit- Pixabay

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों में 1656 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 9265 करोड़ रुपये है। इस गैस पाइपलाइन ग्रिड को पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के 8 राज्‍यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में विकसित किया जाएगा। इस ग्रिड से इन आठ राज्यों में आने वाले समय में न केवल आर्थिक एवं सामाजिक बदलाव आयेंगे, बल्कि आने वाले समय में इन राज्यों में निवेश की रफ्तार तेज़ हो जायेगी। यही नहीं भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने में पूर्वोत्तर अग्रणी भूमिका निभायेगा।

आने वाले समय में होने वाले बदलाव

  • इस ग्रिड का काम पूरा होने के साथ विभिन्‍न प्रकार के उपभोक्‍ताओं जैसे कि औद्योगिक, पीएनजी (घरेलू), परिवहन, इत्‍यादि को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी।
  • इससे द्रव ईंधनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुगमता से पहुंचाया जा सकेगा।
  • पाइपलाइन ग्रिड उपभोक्‍ताओं के लिए प्राकृतिक गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
  • औद्योगिक विकास का माहौल विकसित होगा और स्‍वच्‍छ एवं हरित ईंधन का उपयोग होने की बदौलत लोगों का जीवन स्‍तर बेहतर होगा, यानी क्वालिटी ऑफ लाइफ में इज़ाफा होगा।
  • इससे उत्‍खनन या खोज और उत्‍पादन संबंधी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और इसके साथ ही यह क्षेत्रीय गैस स्रोतों को पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ेगा।
  • एलपीजी (रसोई गैस) के लिए बॉटलिंग प्‍लांट लगाने के अवसर तलाशे जा सकते हैं, ताकि एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

गैस ग्रिड का कार्य इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड को सौंपा गया है। यह कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओसीएनजी), गेल इंडिया लिमिटेड (गेल), ऑयल इंडिया लिमिटेड और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) का संयुक्त उपक्रम है। इस उपक्रम की स्थापना 10 अगस्त 2018 को हुई थी, जिसका उद्देश्‍य नॉर्थ ईस्ट के आर्थिक विकास के लिये पर्यप्त मात्रा में ईंधन मुहैया कराना है। साथ ही प्राकृतिक गैस के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना है।

Indradhanush Gas Grid

बात अगर आर्थिक विकास की की जाये, तो उसके लिये निवेश सबसे अहम भूमिका निभाता है। देश के पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश के ढेरों अवसर हैं। गैस ग्रिड स्‍थापित होने के बाद यहां निश्चित तौर पर निवेश बढ़ेगा और सभी आठ राज्यों की आर्थिक गति को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

ग्रिड से जुड़े 8 राज्य और उनमें निवेश की संभावनाएं-

अरुणाचल प्रदेश

भूटान, चीन और म्यांमार के बॉर्डर से लगे अरुणाचल प्रदेश में दक्षिण एशियाई देशों के साथ अंतर्राष्‍ट्रीय व्यापार की अपार संभावनाएं हैं। यहां पर कृषि, हस्तकला, गन्ने और बांस, हॉर्टीकल्चर (बागबानी), ऊर्जा और खनन पर आधारित उद्योग मुख्‍य रूप से यहां पर हैं। इस राज्य में जल-विद्युत के जरिए बिजली बनाने की सबसे अधिक सामर्थ है। 601 से अधिक ऑर्किड और दवाएं बनाने के लिये लाभकारी पौधों की 500 से अधिक प्रजातियां यहां पायी जाती हैं। यहां पापुम पारे जिले में रोंगोगे मेग फूड पार्क स्थापित किया जा रहा है, जहां 30 खाद्य उद्योग लगेंगे और 4000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। इस राज्य में सिल्क की सभी चार वाराइटी उपलब्‍ध हैं। 2015-16 में यहां 37 मिलियन टन सिल्क उत्पादन हुआ, जो 2018-19 में बढ़ कर 59 मिलियन टन हो गया। यह उद्योग तेजी से बढ़ रहा है।

असम

असम राज्य बांग्लादेश और भूटान से लगा हुआ है। यहां पर छह एयरपोर्ट हैं और दो इनलैंड वॉटरवेज़ और एक इनलैंड कंटेनर डिपो, जो असम को देश के बाकी राज्यों से जोड़ते हैं। पड़ोसी देश भूटान से सड़क मार्ग से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा जा चुका है। असम चाय के बागानों के लिये जाना जाता है। भारत में होने वाले चाय उत्पादन में 50 प्रतिशत योगदान असम का होता है। एग्री-एक्सपोर्ट, ऑयल रिफाइनरी, फूड प्रोसेसिंग पार्क के लिये यह राज्‍य अपनी अलग पहचान रखता है। असम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के मामले में भी काफी आगे है। राज्य की क्षमता 150,000 बैरल पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस प्रति दिन की है। यह भारत में प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है। गैस ग्रिड से जुड़ने के बाद यह राज्य न केवल स्वयं आगे बढ़ेगा, बल्कि बाकी के राज्यों की अर्थवस्‍था को संवेग प्रदान करेगा। असम सरकार बोनगोरा गुवाहाटी में 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आईटी पार्क स्थापित करने की योजना बना रही है। इसमें 700 मिलियन डॉलर के निवेश का अनुमान है।

मणिपुर

मणिपुर राज्य का 70 फीसदी क्षेत्र वन क्षेत्र में आता है। वन उत्पाद जैसे टिम्बर, फायरवुड, बैम्बू, आदि यहां के प्रमुख उत्पाद हैं। यहां फिग, ऑलिव और मैंडरिन का उत्पादन अच्‍छी तादाद में होता है। मणिपुर में पैदा होने वाले अनाज में 80 प्रतिशत धान होता है। सब्जियों और फलों की पैदावार के क्षेत्र में यह राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। सिल्क उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने जापान सरकार के साथ मिलकर उद्योग को तेज़ी से आगे बढ़ाया।

मेघालय

भारत में सबसे ज्यादा बारिश मेघालय में होती है। जल-विद्युत ऊर्जा में यह राज्य काफी आगे है। दवाएं बनाने में प्रयोग किये जाने वाले 6000 पौधों में से 834 पौधों की प्रजातियां केवल मेघालय में पायी जाती हैं। यहां सबसे अच्‍छी क्वालिटी वाली हल्दी पायी जाती है। स्‍ट्रॉबेरी के उत्पादन में यह क्षेत्र काफी आगे है। यहां कोयले, लाइमस्टोन, ग्रेनाइट, क्वार्ट्ज, काओलिन फेल्‍डस्‍पार, इंडस्ट्रियल क्ले, यूरेनियम आदि के भंडार है। खनन के क्षेत्र में निवेश के लिये इस राज्य में अपार संभावनाएं हैं।

मिज़ोरम

मिज़ोरम देश का दूसरा सबसे ज्यादा शिक्षित राज्य है। 2013 से 2016 के बीच यहां की अर्थव्‍यवस्‍था 8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी। त्लांग और तियाउ नदियों के चलते यहां जल-विद्युत पावर की क्षमता तेज़ी से बढ़ रही है। इस राज्य में 4500 मेगावॉट बिजली उत्पादन की सामर्थ है। 2018 के वित्तीय वर्ष में मिज़ोरम में 83.6 मीट्रिक टन रॉ सिल्क का उत्पादन हुआ। जबकि 2019 के वित्तीय वर्ष में महज अप्रैल से दिसंबर के बीच ही 75 मीट्रिक टन उत्पादन हो चुका है। यानी इस क्षेत्र में यह राज्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मत्स्य पालन की बात करें तो यहां पर 24 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मत्स्य पालन किया जा सकता है। 2017-19 में 5468.37 हेक्टेयर क्षेत्र का प्रयोग मत्स्य पालन में हुआ, जिससे 7 हजार मीट्रिक टन से अधिक कुल उत्पादन हुआ। जरा सोचिये जिस दिन पूरे 24 हजार हेक्टेयर क्षेत्र उत्‍पादन के कवरेज में आ गया, उस दिन उत्पादन तीन गुना बढ़ सकता है। कुल मिला कर मत्स्य पालन में निवेश में बड़ी संभावनाएं हैं।

नागालैंड

नागा चिली विश्‍व प्रसिद्ध है। हालांकि मिर्च के अलावा यह राज्य कई सारे कृषि उत्पादों के लिये जाना जाता है। यहां के 71 प्रतिशत लोग कृषि पर जीवन यापन करते हैं। जिसमें फलों का उत्पादन ज्यादा होता है। केला, मोसंबी, अनन्नास आलू मुख्‍य रूप से पैदा होते हैं। नागालैंड भारत में कोबाल्ट का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस राज्य की क्षमता 600 मिलियन टन क्रूड ऑयल की है। शहद के उत्पादन में इस राज्य का जवाब नहीं। यह राज्य में 15,000 मीट्रिक टन शहद और 100 मीट्रिक टन मोम उत्‍पादन की सामर्थ रखता है, जिससे प्रतिवर्ष 100 मिलियन डॉलर रेवेन्‍यू आता है। इस राज्य में सेरीकल्चर, खनन और कृषि में निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

सिक्किम

जल-विद्युत संयंत्रों के जरिए पूर्वोत्तर में सबसे अधिक बिजली उत्पादन क्षमता सिक्किम की है। यह मुख्‍य रूप से कृषि आधारित है। धान, मक्का, सोयाबीन, अदरक, संतरे, नासपाती, आलू और टमाटर का उत्पादन यहां प्रमुख रूप से होता है। सिक्किम देश का सबसे बड़ा इलाइची का निर्यातक है। यह भारत का पहला पूर्ण ऑर्गेनिक राज्य है। यहां 315 ग्लेशियर हैं और दुनिया की तीसरा सबसे ऊंचा शिखर कंचनजंगा है। यह भारत का सबसे सुरक्षित पर्यटन गंतव्य है। 2016 में केंद्र सरकार ने स्वदेश दर्शन योजना के तहत सिक्किम के लिये 14.6 मिलियन डॉलर की धनराशि आवंटित की थी। सिपला, ज़ाइडस केडिला, आल्केम लैब, इंटास फार्मा, टोरेंट फामास्युटिकल्स, यूनीकेम, आदि कई बड़ी दवा कंपनियों की इकाईयां यहां स्थापित हैं। इस राज्य में पर्यटन, दवाओं के कारोबार, और कृषि के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

त्रिपुरा

त्रिपुरा की 42 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। यह ट्रू पोटेटो सीड की सबसे बड़ा उत्पादक है। रबर, चाय-आधारित प्लांट यहां के प्रमुख उद्योग हैं। हाल ही में यहां इस्पात उद्योग भी तेजी से बढ़ा है। त्रिपुरा में पांच इंडस्ट्रियल इस्टेट, एक इंडस्ट्रियल एरिया, दो ग्रोथ सेंटर और एक एक्सपोर्ट प्रोमोशनल इंडस्ट्रियल पार्क हैं, जो यहां की अर्थवयवस्‍था में बड़ा योगदान करते हैं। यहां पर विद्युत उत्पादन मांग से अधिक है। यह राज्य प्राकृतिक गैस का बड़ा स्रोत है। खास कर मीथेन गैस का। आईटी क्षेत्र में भी यह राज्य काफी आगे है। मुंबई और चेन्नई के बाद भारत का तीसरा इंटरनेशनल इंटरनेट गेटवे अगरतला से संचालित होता है। अगरतला में स्‍थापित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क यहां का आईटी हब है। फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय अगरतला के पास तुलाकोना में 50 एकड़ जमीन पर मेगा फूड पार्क स्‍थापित करने के लिये मंजूरी दे चुका है।

कुल मिलाकर देखा जाये तो इन राज्यों के गैस ग्रिड ग्रिड से जुड़ने के बाद ईधन पहुंचाना सुगम हो जायेगा और इससे बड़े उद्योगों को सस्ता ईंधन प्राप्त हो सकेगा। लिहाज़ा केंद्रीय कैबिनेट ने जिस गैस ग्रिड को मंजूरी दी है, वो निकटतम भविष्‍य में नॉर्थ ईस्ट की अर्थव्‍यवस्‍था को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले वर्षों में यहां रोजगार के अवसर वृहद स्तर पर खुलेंगे। और तो और भारत को 5 ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने में नॉर्थ ईस्ट का बड़ा योगदान होगा।

New Delhi | PBNS Bureau