सुरक्षा की दृष्टि से उपयोगी साबित होगा ड्रोन का रजिस्ट्रेशन

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केंद्र सरकार ने आज से सभी ड्रोन उपयोगकर्ताओं को सरकारी पोर्टल पर अपने ड्रोन का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य कर दिया है। फिर चाहे वो खिलौना ही क्यों न हो। लिहाज़ा अगर आपके पास ड्रोन है, तो आज ही उड्यन मंत्रालय की वेबसाइट डिजिटल स्काई पर 31 जनवरी तक लॉगिन कीजिये। और अगर आप ड्रोन खरीदने जा रहे हैं, तब कई ऐसी बाते हैं, जो आपको जरूर जाननी चाहिये। असल में केंद्र ने यह फैसला सुरक्षा की दृष्टि से लिया है।

ड्रोन यानी फ्लाइंग रोबोट जिसे रिमोट से कंट्रोल किया जाता है। ड्रोन को मानव रहित विमान भी कहते हैं। ड्रोन का प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है जहां मनुष्य खुद नहीं पहुंच पाता। ड्रोन अलग-अलग रंग-रूप और आकार, वजन के होते हैं। आज के समय में ड्रोन काफी उपयोगी साबित हो रहा है। ड्रोन भूकंप और बाढ़ जैसे हालात में स्थिति की जानकारी के लिए भी काफी उपयोगी है। इसलिए इसकी मांग भी बढ़ रही है। लेकिन ड्रोन का प्रयोग हथियार के रुप में भी किया जा रहा है। यानी अगर ड्रोन मशिनों का गलत इस्तेमाल किया जाए तो देश के लिए खतरा हो सकता है। जिसे लेकर सरकार भी गंभीर है। ड्रोन जितने आधुनिक होंगे, उतने ज्यादा प्रभावी भी।

ड्रोन का एडवांस वर्जन BVLOS

ड्रोन का ही एडवांस वर्जन होता है बियॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट (BVLOS)। जल्द ही केंद्रीय नागर विमानन मंत्रालय वाणिज्यक ड्रोनों BVLOS का परिक्षण करने वाला है। ड्रोन इंडस्ट्री में बियॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट (BVLOS) सबसे ज्यादा चर्चित है। दुनिया भर के देश अपनी ड्रोन नीतियों में संशोधन कर रहे हैं ताकि वे अधिकतम दक्षता के लिए मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) को बियॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट से उड़ान भरने की अनुमति दे सकें। बीवीएलओएस उड़ानें दृश्य सीमा से परे उड़ती हैं। BVLOS क्षमताएं ड्रोन को अधिक से अधिक दूरियों को कवर करने में सक्षम बनाती हैं।

दरअसल केंद्रीय नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 6 जनवरी को कहा था कि दृष्टि से ओझल होने के बाद उड़ने वाले वाणिज्यक ड्रोनों (BVLOS-‘बियॉन्ड विजुअल लाइन’) के परिचालन का अध्ययन करने के लिए जनवरी में परीक्षण किये जाएंगे और फिर नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) उनपर मसौदा नियमावली बनाएगा। उन्होंने कहा था कि परिक्षण के बाद केंद्र कुछ सप्ताह में बीवीएलओएस और अन्य ड्रोनों का पंजीकरण भी शुरू करेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी का भावी इस्तेमाल बहुत अधिक है, इसलिए केंद्र बीवीएलओएस ड्रोनों को इजाजत देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भारत में फिलहाल BVLOS उड़ाने की इजाजत नहीं

आपको बता दें कि फिलहाल भारत में ,बीवीएलओएएस ड्रोनों को आसमान में उड़ान भरने की इजाजत नहीं है। अगर कोई ड्रोन नजर के सामने उड़ान भरता है तो डीजीसीए उचित प्रक्रिया के बाद उसकी अनुमति देता है। ड्रोन फेस्टिवल ऑफ इंडिया के दौरान पुरी ने कहा था कि इस महीने अध्‍ययन के बाद परीक्षण किये जाएंगे। डीजीसीए सीएआर का मसौदा तैयार करेगा और फीडबैक के लिए उसे संबंधित पक्षों के साथ साझा किया जाएगा।  सीएआर 2.0 से बीवीएलओएस परिचालन में क्रांति आएगी और वह वाणिज्यिक रूप लेगा।

जनवरी मध्य में भारत के सभी ड्रोन उपयोगकर्ताओं को नागर विमानन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। इसमें खिलौना ड्रोन प्रयोग करने वाले लोग भी होंगे शामिल होंगे। इससे ड्रोन प्रयोग करने वाले लोगों का एक डेटा बेस तैयार होगा। जो सुरक्षा के लिहाज से जरूरी भी है। साथ ही ड्रोन उड़ाने वाले को परीक्षण भी लेना होगा।

BVLOS ड्रोन के फायदे

ड्रोन BVLOS के कई फायदे हैं। बीवीएलओएस ड्रोन को कम समय में अधिक डेटा एकत्र कर सकते हैं। इसके साथ ही बीवीएलओएस ड्रोन को तैनात करने में पारंपरिक तरीकों जैसे मानवयुक्त हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज की तुलना में कम खर्च होता है। ड्रोन उड़ान की कम ऊंचाई उन्हें उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा संग्रह के लिए बेहतर बनाती है। कई मामलों में, ड्रोन मनुष्यों को एक खतरनाक स्थिति फंसने से बचाते हैं।

ड्रोन के प्रकार और उनके वजन

नागर विमानन महानिदेशालय ने ड्रोन के मुख्यत 5 प्रकार निर्धारित किये हैं ।

नैनो ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 250 ग्राम तक होता है।

माइक्रो ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 250 ग्राम से अधिक लेकिन 2 किलो ग्राम से कम होता है।

स्मॉल ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 2 किलो ग्राम से अधिक लेकिन 25 किलो ग्राम से कम होता है।

मीडियम ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 25 किलो ग्राम से अधिक लेकिन 150 किलो ग्राम से कम होता है।

लार्ज ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 150 किलो ग्राम से अधिक होता है।

भारत में ज्यादातर ड्रोन नैनो और माइक्रो प्रयोग होते हैं। नागर विमानन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। उसके बाद बिना रजिस्ट्रेशन के ड्रोन उड़ाने वालों पर कार्रवाई की जाएगा।

ड्रोन को लेकर नए नियम

दरअसल देश की सुरक्षा एजेंसियां और सेना को छोड़ दें तो सीविल में ड्रोन के प्रयोग को लेकर गाइडलान अभी पूरी तरह से नहीं आई है। लेकिन अब सरकार इसे लेकर सजग हो गई है और 2018 में सरकार ने एक ड्रोन उड़ाने को लेकर एक गाइडलाइन जारी की थी। जिसके तहत कुछ एरिया निर्धारित किए गए जहां ड्रोन नहीं उड़ाए जा सकते हैं।

एयरपोर्ट, दिल्ली के हाई स्कयोरिटी वाले इलाके जैसे विजय चौक, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन के आस-पास के इलाके। सैन्य प्रतिष्ठानों के उपर और उसके पांच किमी तक ड्रोन उड़ाने की पाबंदी है।  इसके अलावा एलओसी, अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किमी तक ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं है। घनी आबादी वाले इलाके या आपातकालिन ऑपरेशन चल रहे इलाके में नहीं उड़ा सकते। इसके लिए जोन भी बनाए गए हैं।

नैनो ड्रोन के अतिरिक्त अन्य सभी ड्रोन को विमानन नियामक (Aviation Regulator) से विशिष्ट पहचान संख्या (Unique Identification Number-UIN) प्राप्त करना आवश्यक होता है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि विशिष्ट पहचान संख्या ड्रोन पर प्रदर्शित हो।

New Delhi | PBNS Bureau