जम्मू-कश्‍मीर में पिछले डेढ़ माह में 60% तक कम हुई हिंसा

निष्प्रभावी आतंकवादियों के दफन के दौरान मुठभेड़ स्थल पर कानून और व्यवस्था अथवा पथराव की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है

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Srinagar (Armed Forces)

जम्मू कश्‍मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से संघ शासित राज्य की कानून व्यवस्था में तेजी से सुधार हो रहा है। अगर बीते 45 दिनों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो घाटी में हिंसा की वारदातों में 60 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के मुताबिक यहां के युवा भी अब आतंकी संगठनों ज्‍वाइन करने की जगह बेहतर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। डीजीपी ने शनिवार को केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह से नई दिल्ली में मुलाकात की और सुरक्षा के वर्तमान परिदृश्य की जानकारी दी।

लगभग आधा घंटे हुई बातचीत में डीजीपी ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से भी कम समय में जम्मू और कश्मीर में आतंक संबंधी हिंसा में पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। साथ ही निष्प्रभावी आतंकवादियों के दफन के दौरान मुठभेड़ स्थल पर कानून और व्यवस्था अथवा पथराव की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सुरक्षाबलों के कार्यों और जम्मू और कश्मीर पुलिस (जेकेपी) और अर्धसैनिक बलों के बीच समन्वय की सराहना की, जो संघ शासित प्रदेश में राज्यपाल शासन लागू होने और उसके गठन के बाद संसक्त और प्रभावी हो गया है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पिछले डेढ़ महीने में कानून और व्यवस्था की कोई बड़ी समस्या उत्पन्न नहीं हुई है।

45 दिन की रिपोर्ट पर संक्षिप्त नज़र

इस वर्ष 13 फरवरी तक 24 उग्रवादियों को निष्प्रभावी किया गया जिसमें 20 मारे गए और 4 गिरफ्तार कर लिए गए। यह श्रीनगर और अन्य इलाकों में ग्रेनेड हमले में शामिल आतंक फैलाने वाले 12 लोगों की गिरफ्तारी के अलावा है।

आतंकी संगठनों से जुड़े 43 जमीनी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, जो विभिन्न आतंकी संगठनों के विभिन्न कैडरों को हर प्रकार की सहायता / लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रहे थे।

वर्ष 2020 में निष्प्रभावी किए गए 24 उग्रवादियों में से, डीजीपी की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि 10 उग्रवादियों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से था।

जम्मू स्थित बाण टोल प्लाजा पर घुसपैठ करने वाले 3 उग्रवादियों को निष्प्रभावी किया गया। इनमें 11 हिजबुल मुजाहिद्दीन संगठन के थे।

तकनीकी और मानवीय तंत्र को और मजबूत बनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप दक्षिण कश्मीर से 7 युवकों का अपने परिवार में वापस आना संभव हुआ और उन्हें उग्रवादियों के गुट में शामिल होने से रोका जा सका।

बड़े बदलाव, जो अनुच्छेद 370 हटने के बाद दिखे

अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे बड़ा बदलाव है आतंकी गतिविधियों में गिरावट आयी है।

कश्मीर में युवा जो कभी आतंकी संगठन ज्वाइन करने में आगे रहते थे, आज बेहतर जिंदगी की ओर बढ़ रहे हैं।

05 अगस्त, 2019 से नवंबर के अंत तक यानी लगभग 4 महीने में मात्र 14 युवाओं ने ही आतंक की ओर कदम बढ़ाया है। जबकि, पूर्व में 12 से 13 युवा हर महीने आतंक की पाठशाला में दाखिला लेते थे।

अक्‍तूबर से दिसंबर 2019 के बीच आतंकियों ने 299 बार हमला किया। सुरक्षा बलों के आगे उनके सारे मंसूबे नाकाम रहे और 58 आतंकवादी मारे गए।

New Delhi | PBNS Bureau